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Bhoop Singh Bharti

Abstract

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Bhoop Singh Bharti

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बीती रात कमल दस फूले

बीती रात कमल दस फूले

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देख खड़ी प्रभात या, बीत गयी सै रात

बीत गयी नै भूल कै, कर नई  शुरुआत।


कर नई  शुरुआत, पुरानी  बातें  भूले

देखो बीती  रात, कमल दल ये दस फूले।


कहै 'भारती' चलै, विकास की फूलझड़ी

शुभ स्वागत में भई, प्रभात या देख खड़ी।


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