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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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भविष्य की आशा है हिंदी

भविष्य की आशा है हिंदी

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हिंदी मेरा व्यवहार, है हिंदी मेरी बोली,

मेरी लेखनी का मार्ग प्रशस्त करती है मेरी हमजोली,

मेरे दिल की भाषा, मेरी आशा है हिन्दी,

मेरा मान, मेरी शान, मेरे ख़्वाब साकार करने वाली।


कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक

सुगमता से बोली जाती है हिन्दी

हमें जीवन के आदर्श सिखाती

हमारे देश, हमारे वतन की धरोहर है हिन्दी।


आज अंग्रेजी भारत देश की जमीं पर

जरूर खड़ा है पांव जमाकर

पर हमें हमारी संस्कृति और संस्कारों से,

अवगत कराने वाली है केवल हिंदी।


हर भाषा का अपना स्थान

अपना महत्व पर हिंदी की बात निराली है

संस्कृत से उद्गम हुई, भाषाओं में शीर्ष

हिन्दी हमारी बड़ी ही प्यारी है।


कितने महान प्रसिद्धि कवियों की

रचनाओं में झलकती हिंदी की शक्ति

गीतकार के बोल, लेखकों का अभिमान

हिन्दी है भावों की अभिव्यक्ति।


इतिहास रचाया विश्व भर में 

हिंदी हमारी चेतना हमारी अमिट पहचान है

हमारा शब्द है, स्वर व्यंजन है हिंदी

छंद अलंकार से निमित एक वरदान है।


अ से अनपढ़ से हमें ज्ञ से ज्ञानी 

बनाने तक की एक अद्भुत यात्रा कराती

हमारी वाणी में मिठास घोलती 

हिन्दी हमारा सम्मान है, हमारा अभिमान है।


पूरे भारत को एक डोर में बांधती

एकता दर्शाती, है हिंदी हमारी अभिलाषा

सरल, सुगम और सुन्दर रूप इसका 

दिलों में बसी हिन्दी जनमानस की है भाषा।


हिंदी हमारा राष्ट्रीय गान, हिंदी से हमारी पहचान 

हम कभी मिटने ना देंगे इस पहचान को

दिखावा नहीं दिल से अपनाएंगे हिन्दी को

हिंदी आत्मा है, आधार है, है हमारे भविष्य की आशा।


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