Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Mukesh Bissa

Abstract Inspirational

4.0  

Mukesh Bissa

Abstract Inspirational

भूल रहा हूँ

भूल रहा हूँ

1 min
53



मिल कर बेगानों को

अपनों को खो रहा हुं

इस जहां में अपना

वजूद भूल रहा हुं।


अजीब सी दुनिया में कई

चालें बिछती जा रही है

कुछ खो लिया कुछ पाया है

लेकिन क़ुबूल कर रहा हूं ।


दूसरों पर तोहमत 

कैसे रखूं अब मै

जब घर में अपना वजुद

शीशे में ढूंढ रहा हूँ ।


सम्बन्ध की इस दुनिया

को फैलाया बहुत सारा

फूलों की इस बगियाँ 

में कांटे पा रहा हूँ ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract