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Suresh Koundal 'Shreyas'

Inspirational

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Suresh Koundal 'Shreyas'

Inspirational

भूल गए बलिदानों को

भूल गए बलिदानों को

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मिट गए जो बलिबेदी पर भारत मां की ,

क्यों नाम उन शहीदों के याद न रहते ।

कैसे भूले उनके बलिदानों को 

गर वो ना होते .... हम आजाद न रहते ।।


उनके रक्त से रंजित धरा पर

हम सुख चैन से रोटी खाते हैं ।

आजादी की परिभाषा हंस हंस कर,

इस दुनिया को बतलाते हैं ।।


आजादी को पाने की खातिर ,

कितनों ने सीने पर गोली खाई है ।

फिर कहते हो बड़ी शान से

अहिंसा ने आजादी दिलाई है ।।


सत्य अहिंसा की परिभाषा,

आजादी नहीं दिलाती है ।

हक की खातिर भिड़ जाओ,

यह गीता हमें सिखाती है ।।


हैरान हूं मैं लहू बलिदान का,

इतिहास में बन वो धूल गया ।

अमर शहीदों के बलिदान को,

क्यों सारा भारत भूल गया ।।


याद करो सन् सत्तावन की,

वह तलवार पुरानी थी ।

नन्हा बालक बांध पीठ पर,

रानी झांसी ने लिखी कहानी थी ।।


याद करो तुम हल्दीघाटी,

उस राणा के बलिदान को ।

याद करो तुम भारत के लाल,

उस पृथ्वीराज चौहान को ।।


याद करो जब वीर शिवा ने ,

अंग्रेजों पर धावा बोला था ।

उनकी खड्ग की धार के आगे

अंग्रेज़ी सिंहासन डोला था ।।


मंगल पांडे की कुर्बानी से,

हर भारतीय का रक्त ख़ौला था ।

भड़क उठी चिंगारी आज़ादी की ,

दहका आक्रोश का शोला था ।।


याद करो सुखदेव,भगत,राजगुरू,

एक मस्तानों का टोला था ।

झूल गया हंस कर फांसी पर

वो पहन बसंती चोला था ।।


याद करो जल्लियांवाले ,

उस भीषण हत्या कांड को ।

याद करो भारत के वीर सपूत,

उस चंद्रशेखर महान को ।।


सुभाष चन्द्र को याद करो,

जिसने हिंद की फौज बनाई थी ।

अंग्रेजों के आगे डट कर,

अद्भुत लड़ी लड़ाई थी ।।


लाखों वीरों ने प्राण दिए ,

तब आज़ादी हमने पाई है ।

यह कहते मत रहना सिर्फ ,


चरखे से आज़ादी आई है ।।



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