भूल गए बलिदानों को
भूल गए बलिदानों को
मिट गए जो बलिबेदी पर भारत मां की ,
क्यों नाम उन शहीदों के याद न रहते ।
कैसे भूले उनके बलिदानों को
गर वो ना होते .... हम आजाद न रहते ।।
उनके रक्त से रंजित धरा पर
हम सुख चैन से रोटी खाते हैं ।
आजादी की परिभाषा हंस हंस कर,
इस दुनिया को बतलाते हैं ।।
आजादी को पाने की खातिर ,
कितनों ने सीने पर गोली खाई है ।
फिर कहते हो बड़ी शान से
अहिंसा ने आजादी दिलाई है ।।
सत्य अहिंसा की परिभाषा,
आजादी नहीं दिलाती है ।
हक की खातिर भिड़ जाओ,
यह गीता हमें सिखाती है ।।
हैरान हूं मैं लहू बलिदान का,
इतिहास में बन वो धूल गया ।
अमर शहीदों के बलिदान को,
क्यों सारा भारत भूल गया ।।
याद करो सन् सत्तावन की,
वह तलवार पुरानी थी ।
नन्हा बालक बांध पीठ पर,
रानी झांसी ने लिखी कहानी थी ।।
याद करो तुम हल्दीघाटी,
उस राणा के बलिदान को ।
याद करो तुम भारत के लाल,
उस पृथ्वीराज चौहान को ।।
याद करो जब वीर शिवा ने ,
अंग्रेजों पर धावा बोला था ।
उनकी खड्ग की धार के आगे
अंग्रेज़ी सिंहासन डोला था ।।
मंगल पांडे की कुर्बानी से,
हर भारतीय का रक्त ख़ौला था ।
भड़क उठी चिंगारी आज़ादी की ,
दहका आक्रोश का शोला था ।।
याद करो सुखदेव,भगत,राजगुरू,
एक मस्तानों का टोला था ।
झूल गया हंस कर फांसी पर
वो पहन बसंती चोला था ।।
याद करो जल्लियांवाले ,
उस भीषण हत्या कांड को ।
याद करो भारत के वीर सपूत,
उस चंद्रशेखर महान को ।।
सुभाष चन्द्र को याद करो,
जिसने हिंद की फौज बनाई थी ।
अंग्रेजों के आगे डट कर,
अद्भुत लड़ी लड़ाई थी ।।
लाखों वीरों ने प्राण दिए ,
तब आज़ादी हमने पाई है ।
यह कहते मत रहना सिर्फ ,
चरखे से आज़ादी आई है ।।
