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Yashvi bali

Fantasy Inspirational

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Yashvi bali

Fantasy Inspirational

बहती नदी सी ज़िंदगी …

बहती नदी सी ज़िंदगी …

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ये ज़िंदगी यूँ चलती है 

नदी की धारा सी बहती है 

इठलाती सी बलखाती हुई …

कभी कहीं ना रुकती है …

बस यूँ ही चलती चली जाती है 


पास बैठ के किनारे पे …

सोचा कुछ पल कुछ लम्हे 

ये भी उतार लूँ अपनी क़लम से 

अपने इस एहसास को जाते जाते 

सभी से साझा कर जाऊँ … 


हाँ मैं भी एक नदी के जैसी हूँ 

सभी को ये राज़ बता जाऊँ …


किसी ने फूल दिये तो मुस्कुराते हैं 

नदी भी इठलाती ,मचल जाती है 

किसी ने शूल मारा तो …

दिल में चुभन ,धड़कन बढ़ जाती है 

बिलकुल ऐसे ही नदी की शांत ,

शीतल धारा में हलचल सी मच जाती है …


एक पल के लिए सिहर कर 

रुक के …

फिर अपने आप में सिमट के बहती चली जाती है …

एक सा एहसास मैं हूँ या नदिया ,करती चली जाती है 


धारा नदी की है …मेरे वतन की ज़मीं की ,

या बाहर की ज़मीं पे है 

हाथ एक ही हैं …कारीगरी उस ऊपर बैठे की एक सी है …


हाँ पहचान दी उस ने …

यहाँ छोड़ कर जाने की …

जिस ज़मीं पे जन्म लिया 

बस उस नाम की मुहर लगा के हमें …

अपनी ज़मीं को यादगार बना जाना है …


भारत माँ की गंगा धार हूँ मैं …

कभी गंगा किनारे बैठी थी @यशवी …

आज …डार्लिंग नदी सिडनी के किनारे हूँ …


हाँ मैं तो बस जल की धारा हूँ …

बह रही हूँ बिना रोक टोक के 

ना बांध पाया कोई इस धारा की रवानी को 

ना ही रोक पाया कोई बहती सी ज़िंदगानी को 


बस दोनों चलती रहती हैं 

बहती हैं यूँ दिन रात …

अपनी कहानी कहती है 

नदी की सी है ज़िंदगानी ये 

रुकती नहीं ये कभी कहीं 

यूँ बहती चली जाती है …



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