shekhar kharadi
Classics Inspirational
हे गौतम बुद्ध
मुझे अर्पण कर दें !
भिक्षा पात्र में
प्रेम, करुणा, संवेदना
मैं तत्पर ग्रहण कर लूँ
निस्वार्थ हृदय में
भिक्षुणी बनकर
संघ के पथ पर चलने
कबसे उत्सुक थी।
माप-तोल
ममतामय स्नेह
धनुषाकार वर्ण...
वर्ण पिरामिड ...
शाश्वत नश्वर
प्रेम का स्पर...
क्षणिका
कटीं हुई पतंग
तांका लघु काव...
मोर्डन शहर
यही जीवन का सार है। यही जीवन का सार है।
बाबुल ने विदा कर के बेगाना कर दिया, पिया ने उम्र भर ये एहसास दिलाया कि ये उसका घर है... बाबुल ने विदा कर के बेगाना कर दिया, पिया ने उम्र भर ये एहसास दिलाया कि ये उसका...
पुरुषोत्तम श्रीक्षेत्र के श्रीजगन्नाथ हैं उत्कलीयों के जीवंत ठाकुर, जीर्णवेर परित्याग जीर्णोद्धार... पुरुषोत्तम श्रीक्षेत्र के श्रीजगन्नाथ हैं उत्कलीयों के जीवंत ठाकुर, जीर्णवेर ...
विपदा की इस विषम घड़ी में पड़ी अकेली रानी करती विलाप बेसुध सी हो गई थीं तारा रानी किसी तरह से ला... विपदा की इस विषम घड़ी में पड़ी अकेली रानी करती विलाप बेसुध सी हो गई थीं तारा रा...
तस्वीर हमें याद दिलाती है, कुछ मीठी और कुछ खट्टी यादें... तस्वीर हमें याद दिलाती है, कुछ मीठी और कुछ खट्टी यादें...
ओल्ड होम पहुंचा रहा है। ओल्ड होम पहुंचा रहा है।
जाने मस्त कहाँ व्यस्त हो गया जो मानवता अब रुग्ण हो गई। जाने मस्त कहाँ व्यस्त हो गया जो मानवता अब रुग्ण हो गई।
इसी भारत भूमि पे फिर लें जन्म जहाँ शहादत पाई। इसी भारत भूमि पे फिर लें जन्म जहाँ शहादत पाई।
सब लोग शतरंज हैं जानते फिर भी दांव पेच से बाज नहीं आते यहाँ। सब लोग शतरंज हैं जानते फिर भी दांव पेच से बाज नहीं आते यहाँ।
ठोकर खाता हूं उठता हूँ फिर भी चलता जाता हूँ। ठोकर खाता हूं उठता हूँ फिर भी चलता जाता हूँ।
मत भूलों की एक दिन सबको बूढ़ा होना है, देखेंगे जो बच्चें अपने वो ही फिर दोहरायेंगे। मत भूलों की एक दिन सबको बूढ़ा होना है, देखेंगे जो बच्चें अपने वो ही फि...
अपना हित खुद रखो सुरक्षित अपने नीचे अपनी जमीन बनाये रखो। अपना हित खुद रखो सुरक्षित अपने नीचे अपनी जमीन बनाये रखो।
क्षण भंगुर संसार है यह, मिट्टी का है तू, मिट्टी में मिल जाएगा। क्षण भंगुर संसार है यह, मिट्टी का है तू, मिट्टी में मिल जाएगा।
जब चलते थे तो उन्हें मैंने सीना ताने चलते देखा है... जब चलते थे तो उन्हें मैंने सीना ताने चलते देखा है...
पिता के वंश के अंश हो इसलिए पिता का सम्मान करो। पिता के वंश के अंश हो इसलिए पिता का सम्मान करो।
ऊँगली थाम नेह से तुमको जनक ने चलना सिखलाया। ऊँगली थाम नेह से तुमको जनक ने चलना सिखलाया।
हर चीज है कठपुतली, वक्त के हाथ नाच रही... हर चीज है कठपुतली, वक्त के हाथ नाच रही...
लोग चले जाते हैं रह जाते हैं पन्ने... लोग चले जाते हैं रह जाते हैं पन्ने...
बहुत कम हैं जिंदगी और मौत का फासला ! बहुत कम हैं जिंदगी और मौत का फासला !
यही तो इस अद्भुत पल की विशेषता है कि हर सितारा आतुर है उसकी सराहना करने को _ _ _ यही तो इस अद्भुत पल की विशेषता है कि हर सितारा आतुर है उसकी सराहना करने को _ _ ...