भीतर ले जाए प्रेम
भीतर ले जाए प्रेम
एक नास्तिक का मासूम प्रश्न
हे प्रेममयी कृष्ण, अटल अडिग शिव,
मर्यादित श्रीराम, और सेवक हनुमान,
पूजा-वूजा न ज्यादा करवाइये अपनी,
ये गुण कैसे आयें, बतलाइये भगवान।।
एक आस्तिक का सरल सा उत्तर
पूजा तो, खुद से जुड़ने का इक साधन,
चाहते हो गुण, तो सच्चे प्रेम को दो मान्यता,
प्रेम भी इक तरीका है, सीखने का आचरण
कैसे भी अपने भीतर जाने का चुनो रास्ता।।
