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Anita Chandrakar

Abstract

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Anita Chandrakar

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भारत की पहचान

भारत की पहचान

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अनेकता में एकता ही, भारत की पहचान है।

प्रेम की नदियाँ बहती यहाँ, मेरा वतन महान है।।

तीन रंग से सजा तिरंगा, मिलकर गाएँ राष्ट्रगान।

ऊँचा रहे मस्तक माता का, कम न हो इसका मान।

विविध संस्कृति पनपी यहीं, रंग बिरंगे परिधान है।

अनेकता में एकता ही, भारत की पहचान है।।


राष्ट्र है सबसे बड़ा, इसके खातिर हो जाऊँ बलिदान।

सदा जन्म लूँ इस मिट्टी में, हृदय से करूँ बखान।

गंगा यमुना कलकल बहती , भारत में बसता प्राण है।

अनेकता में एकता ही, भारत की पहचान है।।


स्वर्ग से सुंदर देश हमारा, चढ़े प्रगति के नित सोपान।

चमक रहा है आसमान में, अपना प्यारा हिंदुस्तान।

बेटियों को भी अवसर मिला, छू रही आसमान है।

अनेकता में एकता ही, भारत की पहचान है।।


लहर चली चहुमुखी विकास की, पूरे हुए अरमान।

खड़ा हिमालय प्रहरी बन, सीमा पर तैनात जवान।

गाँवों की हालत सुधरी , पुलकित अब किसान है।

अनेकता में एकता ही, भारत की पहचान है।।


शिक्षा को हथियार बनाकर, हम गाएँ विकास का गान।

स्वच्छ रखे इस धरती को, सबके चेहरे पर हो मुस्कान।

सदा आजाद रहेगा ये देश, हम वीर साहसी संतान है।

अनेकता में एकता ही, भारत की पहचान है।।


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