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Rooh Lost_Soul

Inspirational

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Rooh Lost_Soul

Inspirational

भारत हूँ मैं

भारत हूँ मैं

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आरम्भ थी मैं

प्रारम्भ थी मैं

स्तम्भ थी मैं

कुटुम्ब थी मैं

हाँ , बीते कल का, भारत थी मैं ।।


प्राचीन थी मैं ।

पुरातन थी मैं ।

लीन थी मैं। ।।

शालीन थी मैं ।

बीते कल का, भारत थी मैं ।।


भक्ति थी मैं ।

शक्ति थी मैं ।

मुक्ति थी मैं ।

आसक्ति थी मैं ।

बीते कल का,भारत थी मैं ।।


भगत थी मैं ।

तिलक थी मैं ।

बोस थी मैं ।

बापू थी मैं ।

बीते कल में, आज का भारत थी मैं ।।


आहत हूँ मैं ।

मर्माहत हूँ मैं ।

घातक हूँ मैं ।

ज्ञातक हूँ मैं ।

ये आज का, भारत हूँ मैं


निःशब्द हूँ मैं ।

क्षुब्ध हूँ मैं ।

विवश हूँ मैं।

स्तब्ध हूँ मैं ।

ये आज का, भारत हूँ मैं ।।


क्रोध हूँ मैं

प्रतिशोध हूँ मैं

अवरोध हूँ मैं

विरोध हूँ मैं

ये आज का, भारत हूँ मैं ।।


कुटिल हूँ मैं

चोटिल हूँ मैं

अविचल हूँ मैं

अटल हूँ मैं

ये आज का, भारत हूँ मैं ।।


ईश हूँ मैं ।

अल्लाह हूँ मैं ।

गॉड हूँ मैं ।

बुद्धा हूँ मैं ।

वाहेगुरु हूँ मैं ।

साईं हूँ मैं ।

हर वर्ग का, भारत हूँ मैं ।।


आज़ाद हूँ मैं ।

आवाज़ हूँ मैं ।

आगाज़ हूँ मैं ।

नाराज़ हूँ मैं ।

हाँ आज का, भारत हूँ मैं ।।


वंदन हूँ मैं ।

अभिनंदन हूँ मैं ।

स्पंदन हूँ मैं ।

सज़दा हूँ मैं ।

हाँ आज का, भारत हूँ मैं ।।


निर्भीक हूँ मैं ।

अखण्ड हूँ मैं ।

लोकतंत्र के युग में,

अनेकता में, एक हूँ मैं ।

हाँ आज का भारत हूँ मैं ।।

हाँ आज का भारत हूँ मैं ।।



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