भागदौड़ खेलकूद।
भागदौड़ खेलकूद।
आज कुछ समय,
पीछे चलता हूं,
अपने विद्यार्थी जीवन की,
झांकी प्रस्तुत करता हूं।
सुबह जल्दी उठना,
तैयार होना,
स्कूल के लिए,
जल्दी निकलना।
रास्ते में,
दोस्तों का जुड़ते जाना,
और एक काफिला बन जाना।
क्लास में जाना,
झट से,
अपना बस्ता रखना,
और मैदान में उतर आना।
दोस्तों के संग,
जमकर खेलना,
जो टीम हारी,
वो रिफरेशमैट खिलाएं।
फिर जैसे ही,
घंटी का बजना,
तुरंत असैम्बली में,
प्रस्तुत होना।
कसरत करना,
मोटीवेशनल लैक्चर होना,
हाऊस के किसी छात्र या छात्रा द्वारा,
ख़बरें पढ़ना,
दिन की चर्या बताना,
राष्ट्र गान के साथ,
कमरे में चले जाना,
कक्षाएं शुरू हो जाना।
सबकी नजर,
इस बात पर होना,
कौन सा टीचर आया,
और कौन सा नहीं आया।
अगर आया,
तो कौन सा रंग पहना,
अगर तो हरा,
तो प्रकृति की तरह,
मुड़ शांत समझना।
अगर सफेद,
तो पढ़ाई में डटना पड़ेगा।
और अगर लाल,
तो फिर लगेगी मार।
घंटी बजती,
सब भागकर नलके पर,
खुब धक्का मुक्की,
पीना कम,
गिराना अधिक,
दस मिनट लगा देना,
फिर क्लास में जाना।
तीस मिनट रह गये,
अगर टीचर थोड़ा हंसमुख,
गप्पों में लगा देना,
दस मिनट और निकाल देना।
अब यह गये बीस,
कोई कठिन सवाल,
फंसा देना,
दस मिनट और निकल गये।
बस दस मिनट पढ़ाई करना,
अगली घंटी बज जाना।
अगर आ गई कोई,
खाली घंटी,
तो खेल के,
मैदान में चले जाना,
और छुट्टी होने तक,
खेलते रहना।
ऐसा विद्यार्थी जीवन,
दुआ करता हूं,
हर कोई पाए।
बस खेल खेल में,
स्कूल का समय गुजर जाए।
