भाग कोविड़ 19
भाग कोविड़ 19
पहले भी ऐसे दौर आएं थे,
मानव हिल गया था
लाशों के अंबार लगे थे
आंखों से ना आंसू थमे थे।
सन्नाटा पसरा था गांव में
रोता मासूम बिना आंचल की छांव में।
भैया खोया था, भाभी भी नहीं थी
बहना ने संभाला था
मां बन पाला था।
हम आज भी डटे हैं,
मतभेद बहुत है हमारे,
मनभेद की कोई बात नहीं है।
हरा दे हम को
कोविद 19 की यह औकात नहीं है
जीत के आते थे जैसे दादा /परदादा,
जीतने के हालात वही है।
सामाजिक दूरी, मास्क और सफाई,
हम सभी के हथियार यही है।
बच के भाग जा कोवीद प्यारे
रणबांकुरे तैयार खड़े हैं।
