STORYMIRROR

Antariksha Saha

Abstract

3  

Antariksha Saha

Abstract

बगरस निगाहें तेरी

बगरस निगाहें तेरी

1 min
289

बगरस निगाहें तेरी

आँखों की सुराही तेरी

करती हैं क्या बातें साहेबान

 

मन की दुआ इन मेरी

रूबरू न आएं तेरी

करती हैं क्या बातें साहेबान

 

जुस्तजाजु मेरी वह ही हैं

रूबरू कैसे हो सकूँ

उसको बता दे साहेबान

 

बगरस निगाहें तेरी

आँखों की सुराही तेरी

करती हैं क्या बातें साहेबान।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract