बेटियाँ
बेटियाँ
कुदरत की उत्पत्ति का प्रारम्भिक बीज हूँँ मैं
नए रिश्ते बनाने वाली रीत हूँ मैं
रिश्तों को प्यार से बाँधने वाली डोर हूँँ मैं
जिसने हर मुश्किल में सम्भाला उस पिता की बेटी हूँ मैं
एक खूबसूरत अह्सास हूँ मैं
निश्चल मन सी विशाल दिल रखने वाली परि सी हूँ मैं
चंचल सुमन मधुर आभा सी हूँ मैं
कड़कती धूप में शीतल बयार हूँ मैं
वो उदासी के हर दर्द का इलाज कर देती वो बेटी हूँ मैं
घर आँगन की रौनक फुदकते गौरैया सी हूँ मैं
अंधकार में उजाले फैलाए वो उम्मीद हूँ मैं
कठिनाईयों को पार करती असंभव की तरह हु मैं
हर प्रश्न का सटीक जवाब हूँ मैं
इन्द्रधनुष के सात रंगों की तरह हूँ मैं
कभी बहन, कभी पत्नी, माँ जीवन के हर रिश्ते को
बखूबी निभाती एसी बेटी हूँ मैं
पिता की उलझन को सुलझाती हूँ मैं
पिता की पगड़ी, उनका गर्व सम्मान हूँ मैं
वो काफिया जो किसी ग़ज़ल को मुकम्मल कर दे
वो अक्षर जिसके बिना वर्ण माला अधूरी रह जाए
एसी प्यारी सी अपना वज़ूद रखती बेटी हूँ मैं
लबों की मुस्कराहट, दिल का सुकून हूँ मैं
माँ-पिता की आराधना का प्रतिफल हूँ मैं
माँ, बाबुजी की सुनी आँखों का सपना हूँ मैं
स्नेह, प्यार, प्रीत का एहसास हूँ मैं
जिंदगी के कमल पे चमकती शबनम की बूंद हूँ मैं
आशावादी उम्मीदों के खूबसूरत गुलाबो की भीनी-भीनी खुशबू हूँ मैं
परिवार के सुख दुःख में साथी, हमदर्द, हमराज़ हूँ मैं
जीवन का आधार,माँ पिता के दर्द को समझती कहे बिना ही सुन जाती हूँँ मैं
घर को स्वर्ग बनाती, खुशी से सहती प्रसव पीड़ा
अपने सपनों के पंख लगा उड़ान भरते एक पंछी हूँ मैं
तितली की तरह उड़ती फिरती,
मेरे आने से पतझड़ भी बसंत बन जाए एसा अह्सास हूँ मैं
साहसी हूँ जो अंतरिक्ष में भेजी गई
एसा देश का गुमान हूँ मैं
एसी कर्म करने, पद्मिनी, झाँसी की रानी हूँ मैं
जो सहेली संग अठखेलियाँ करती गीत मल्हार गाती
कलियों में फूलों की तरह और एसी वर्षा जो ना आई
तो खुशियों भरी धरा बंजर हो जाएगी
सुबह की पहली सूरज की किरण जो जीवन में नया सवेरा,
नई उमंग लाती ऐसी बेटी हूँँ मैं।
