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Kusum Joshi

Abstract

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Kusum Joshi

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बेटी की विदाई

बेटी की विदाई

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दिन आज खुशी का है ग़म का या,

समझ नहीं पाता हूँ मैं,

खुशी मनाऊं रो लूँ की या,

समझ नहीं पाता हूँ मैं,


झूमूँ नाचूं खुशी मनाऊं,

या चुपके से आंसू बहाऊँ,

स्वागत नए रिश्ते का कर लूं,

या साथ पुराना खोने से डर लूँ,

चेहरे पर क्या भाव ले आऊँ,

समझ नहीं पाता हूँ मैं।


किसे सुनाऊं किस्से अपने,

कसको कह लूँ सारे सपने,

हक़ से किस पर गुस्सा कर लूं,

या किस पर अधिकार जताऊं,

द्वंद ये मन का किसे बताऊं,

समझ नहीं पाता हूँ मैं।


नए जीवन की आशीष तो दे दूं,

पर जाने को कैसे कह दूं,

पकड़ के उंगली साथ में चलना,

पल में हंसना पल में रोना,

बचपन की यादें कैसे भुलाऊं,

समझ नहीं पाता हूँ मैं।


नई नई ज़िन्दगी में उसकी,

खुश हो जाऊं खुशी में उसकी,

मन में रो लूं और फिर हंस लूं,

असमंजस को कहां छुपाऊं,

दुविधा अपनी किसे बताऊं,

समझ नही पाता हूँ मैं।


रीति जहां की कैसे निभाऊं,

ग़म में भी कैसे हंस जाऊं,

टूट रहा हूँ मैं ख़ुद से ही,

उसको कैसे गले लगाऊं,

बहते आंसू कहां छुपाऊं,

समझ नहीं पाता हूँ मैं।


खुशियों का दिन है ग़म का या,

समझ नहीं पाता हूँ मैं,

खुशी मनाऊं रो लूं कि या,

समझ नहीं पाता हूँ मैं।।


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