STORYMIRROR

राजेन्द्र कुमार मंडल

Inspirational

4  

राजेन्द्र कुमार मंडल

Inspirational

बेटी की अभिलाषा

बेटी की अभिलाषा

1 min
333

हम बेटी इस दिव्य जगत् के,

कभी कोख में ही मिट जाते हैं।

होते हैं जब अवतरित धरा पर,

तो भी जुल्म हम पर ढाते हैं।।


प्रकृति ने सृजन कर जगत् में हमें उतारा है।

फिर तो मानव ये कैसा भेदभाव पसारा है?

उड़ सकते हैं उन्मुक्त गगन में हम भी,

हमें परी तो बन जाने दो।

भ्रम के जंजाल को तोड़ो,

हमें भी तो आजमाने दो।।

करेंगे मानवता व जगत् को रौशन,

ऐसी फूलझडियां बन जाने तो दो।


यातनाओं की बेड़ियां हमसे दूर रखो।

हम भी ऊंचे उठ सकते हैं जरा देखो।

जननी जन्मभूमि के लिए करें हम भी समर्पण,

हैं बेटियां भी इस समाज का अमूल्य धन।।


देखो दुनिया वालों बेटियों की भी दिलासा।

गौर से देखो आखिर क्या है?

हम बेटियों की अभिलाषा।। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational