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बे-मौसम बारिश

बे-मौसम बारिश

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इस बे-मौसम बारिश की,

फिजाओं में भी क्या जादू है,

जो, कभी किसी को अपना,

पहला प्यार याद दिला दें

तो कभी किसी को अपने,

बिछड़े दोस्तों की मस्तियों,

में डूबा दे।


ये इस मौसम का ही जादू हैं,

जो कभी किसी नदी को,

किसी समुन्दर से जोड़ दे,

तो किसी परिंदे को आसमाँ की,

ऊंचाइयों में किसी अनजान,

परिंदे से मिलवा दे।


बेजान चलती वो हवाएँ,

बादलों में बहता वो पानी,

हज़ारों चहरों में किसी एक कि,

याद दिला दें।


कोई इस बे-मौसम बारिश में,

अपने हर गम को भुला दे,

कोई बारिश की गिरती बूंदों में,

अपने हर आँसू को छुपा दे।


इस बे-मौसम बारिश की,

फिजाओं में भी क्या जादू हैं,

जो खुशी देखें ना गम,

हर एक को भीगा दें।।


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