बचपन
बचपन
कितना निश्चल, कितना चंचल, कितना प्यारा है ये बचपन,
दादी, नानी और माँ की आँखों का तारा यह बचपन।
बच्चों को यह चाँद और तारे सूरज, बादल भरमाते है,
पूछे तरह - तरह की बातें, यह सब कहाँ से आते है।
फूल, पहाड़, नदी और झरने कैसे शोर मचाते है,
तोता, मैना, चिड़िया, कोयल कैसे गान गाते है।
भोली - भाली बातों से यह सबका मन मोह लेते है,
अपना - पराया यह न जाने दिल में घर कर लेते है।
बचपन जीवन की प्रभात है, मानव जीवन की नींव है,
कोरा - कागज सा यह बचपन, हर घर की तस्वीर है।
