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मानसिंह मातासर

Inspirational

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मानसिंह मातासर

Inspirational

बौनी उड़ान

बौनी उड़ान

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बैठे क्यों हो पंथी इस तरह,

अपने हाथ पर हाथ धरकर।

मंजिल को पाओगे फिर कैसे,

सफर से अनवरत यूँ डरकर ।


कोई रोकेगा राह तुम्हारी,

कोई आकर भी चला जायेगा।

कोई चलकर साथ अविराम,

तेरा हमसफर भी कहलायेगा।


मन की लौ को तू यूँ न बुझा,

हरपल खुद को न कुंठित कर।

फैलेगा उजाला तेरे यश का,

श्रमबून्दों से प्रज्ज्वलित कर।


नहीं तो, असफलता की गठरी,

जीवन भर तुम्हें पड़ेगी ढोनी।

तेरे हसीन सपनों की सतरंगी ,

रह जाएगी वह उड़ान बौनी।।


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