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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Drama Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract Drama Inspirational

"बातों से नही काम से जवाब"

"बातों से नही काम से जवाब"

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लोगों को बातों से नही, काम से जवाब दो

कोरे नारों से नही, तुम जुनून से इंकलाब दो

जो हंसते है, तुझको कुछ भी न समझते है,

उन्हें आज अमावस में पूनम का चराग दो


लोगों के तानों पर कभी तुम भडको मत,

उनके तानों से तुम खुद को ललकार दो

कठोर परिश्रम से उनको तुम नकार दो

आज उनकी छींटाकशी को, तुम हार दो


तू नही, तेरा वक्त बुरा है, यह स्वीकार लो

आज शोलों को, तुम शबनम की आग दो

अपने धैर्य के धनुष से आज, वो टंकार दो

बहरे हो चुके, लोगों को आज आवाज दो


लोगों को बातों से नही, काम से जवाब दो

सोने से ख्वाब पूरे नही होते, यह जान लो

ख्वाब साकार हेतु, नित थोड़ी नींद त्याग दो

अपने लक्ष्य हेतु, रात्रि को भोर का राग दो


उनके मुँह पर ताले लगाने का अंजाम दो

उठो, जागो कर्म करो, आलस्य को त्याग दो

अपने इरादों को आज तुम ऐसी आग दो

वो धधकती रहे, चाहे उसे कितने तूफ़ान दो 



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