Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Antariksha Saha

Tragedy


3  

Antariksha Saha

Tragedy


बारिश की यह बूंदे

बारिश की यह बूंदे

1 min 246 1 min 246

बारिश की यह बूंदे

बस गिरे जा रही हैं

दिल के आग को सीए जा रही हैं


रो हम रहे हैं यहां 

पढ़ सभी अनजान हैं

बारिश मै आंसू खो जा रहे हैं


सब बोलते हैं

सुनता कोई नहीं

बोझ जो दिल मै हैं

ढोए जा रहे हैं


क्या सही क्या गलत कौन समझाए

घर की याद बहुत आती है

पढ़ वोह रास्ता कब बंद हो चुकी हैं


सपनो का शहर

सपने टूटे तोह साथ कोई नहीं रहा

साला यह गम काहे कम नहीं होता हैं


बस हम गॉसिप बने रहे

एक अच्छे खासे इंसान को तुम लोगों ने तोड़ दिया

अपने इमोशंस झिपाए ऐसे घूमते हो जैसे मशीन हो

यह कैसी जिंदगी जिए जा रहे हो

जिनमे पैसे सब हैं और जश्न के लिए लोग नहीं

जो तेरे सफलता पे साथ हैं.



Rate this content
Log in

More hindi poem from Antariksha Saha

Similar hindi poem from Tragedy