Archana Pati
Abstract
बारिश की बूंदें
मन को भा जाए
सूखी सी धरती को
जैसे नव जीवन मिल जाए
मंद मंद हवाओं का शोर
मन का संगीत बन जाए
नन्ही बूंदों की फुहारें
तपती गर्मी से
नई राहत दे जाये
कुछ इस तरह
झूमकर सावन आ जाए।
स्त्रियां
गांव की स्त्र...
पिता
मन बावरा
मां
फाग के रंग
मां शक्ति स्व...
नारी हूं
यही तो प्यार ...
पर क्या पता शायद इसी को ही केहते हैं जीना ! पर क्या पता शायद इसी को ही केहते हैं जीना !
ज़िंदगी की आपाधापी में ज़िन्दगी जीना ही भूल गये ! ज़िंदगी की आपाधापी में ज़िन्दगी जीना ही भूल गये !
गंगा का जल साफ हो गया गंगा का जल साफ हो गया
आज मास्क न पहनना पड़ता न यूँ मुँह ढ़ककर चलते। आज मास्क न पहनना पड़ता न यूँ मुँह ढ़ककर चलते।
अगर तुम मेरे पास होतीं, यह मर्ज नहीं मेरी चाहत है। अगर तुम मेरे पास होतीं, यह मर्ज नहीं मेरी चाहत है।
राह तकते नयन उस मिलन की घड़ी अजब बन गई हूँ विरह साधिका जब। राह तकते नयन उस मिलन की घड़ी अजब बन गई हूँ विरह साधिका जब।
ठीक से पहरेदारी की नसीहत देते, सोने की कोशिश कर रहे हैं। ठीक से पहरेदारी की नसीहत देते, सोने की कोशिश कर रहे हैं।
लौटते थे लोग भी कभी अपने घरों को आज वो ही अपना परदेशी हो गया। लौटते थे लोग भी कभी अपने घरों को आज वो ही अपना परदेशी हो गया।
जीत कामयाबी देती है मगर हार जीना सिखा देती है। जीत कामयाबी देती है मगर हार जीना सिखा देती है।
रामराज्य हित बनें राम दहन करना विनाश का रावण है। रामराज्य हित बनें राम दहन करना विनाश का रावण है।
उनको रहना एक तरफ है, मैं रह लूंगा एक तरफ। उनको रहना एक तरफ है, मैं रह लूंगा एक तरफ।
मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था कल तक मज़दूर था आज मजबूर हो गया ! मैंने तेरा क्या बिगाड़ा था कल तक मज़दूर था आज मजबूर हो गया !
बदलेगा ये देश की देखो क्या होगा, भविष्य बने परदेश की देखो क्या होगा। बदलेगा ये देश की देखो क्या होगा, भविष्य बने परदेश की देखो क्या होगा।
देखना जरूर भारत जरूर विश्वभर में नाम कमाएगा। देखना जरूर भारत जरूर विश्वभर में नाम कमाएगा।
तू तो खुद एक सम्मान है तेरा क्या सम्मान करे मेरी बेटी। तू तो खुद एक सम्मान है तेरा क्या सम्मान करे मेरी बेटी।
दीदार अगर तेरा हो जाए, तो ऐसे कई "नीरज" तुम पर कुर्बान हों। दीदार अगर तेरा हो जाए, तो ऐसे कई "नीरज" तुम पर कुर्बान हों।
हर महामारी से मुक्त, एक नवभारत को उभरते देखा है। हर महामारी से मुक्त, एक नवभारत को उभरते देखा है।
तब जीवन उठता है दहक उठती है चारों ओर महक। तब जीवन उठता है दहक उठती है चारों ओर महक।
छोड़ के गाँव को जब मै शहर में आया दादी माँ को वही गाँव में छोड़ आया छोड़ के गाँव को जब मै शहर में आया दादी माँ को वही गाँव में छोड़ आया
कड़ी धूप में देह तपाता, दर्द छुपाता;न अश्रु बहाता हूँ श्रम से सींचता धरा को, मैं मजदूर कड़ी धूप में देह तपाता, दर्द छुपाता;न अश्रु बहाता हूँ श्रम से सींचता धरा को, म...