बाल विवाह
बाल विवाह
बोझ समझकर बढाया मुझको
कमजोर समझकर पाला मुझको
संसार से छिपकर रखा मुझको
आखिर दुल्हन बना दिया मुझको।
संस्कारों की दास्तां में जकड दिया
संयुक्त परिवार में बंदी बना दिया
मेरी पीडा समझ ना आयी माॅं तुझको
आखिर दुल्हन बना दिया मुझको।
गुडियों से चुल्हे में हुआ परिवर्तन
सिंदुर लगाना पडा जहां लगाते थे चंदन
यह कैसे बंधन में डाल दिया मुझको
आखिर दुल्हन बना दिया मुझको।
बचपन में कहा था साथ ना छोडेंगे
कभी सोचा भी ना था यह वादा तोडेंगे
दिल में अरमान जगाकर यूॅंही धोखा दे दिया मुझको
आखिर दुल्हन बना दिया मुझको।
आज नए घर में प्रवेश करुॅंगी
माॅं-बाबा के प्यार से वंचित हो जाऊॅंगी
फिर जिंदगी गुजारनी है किसी और के साथ मुझको
आखिर दुल्हन बना ही दिया मुझको।।
