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Divyanjli Verma

Children

3  

Divyanjli Verma

Children

बाल मजदूर

बाल मजदूर

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आज फिर एक बचपन,

जिम्मेदारियों से हार गया।

पढ़ाई की उम्र में,

काम करने की जरूरत क्यों पड़ी होगी?

क्या जरूरतें शिक्षा से बड़ी होगी?

सब स्कूल जाते है,

बड़ा आदमी बनने के सपने ले के।

उसका सपना तो बस, 

आज ज्यादा सब्जी बिकने की है।

खेलने की उम्र में तराजू ले के बैठा है।

"सब्जी ले लो साहब" एक बचपन कहता है।

चला गया अब वो कानून,

बाल मजदूर के नाम पर भाषण दे गया।

सबको शिक्षा देने की बात कहता था जो,

आज वही बचपन,

उसके घर सब्जी दे गया।


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