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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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बाहरी दुनिया

बाहरी दुनिया

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इंसान को फितरत भी अजीब होती है,

अपनो को छोड़ दूसरो के करीब होती है,


अपनी नही दूसरो की बीवी हसीन लगती है,

अपनी दुनिया अच्छी लगे ना लगे,


बाहरी दुनियां हमेशा हसीन लगती है,

बाहरी दुनिया के ख्यालों में खोए रहते हैं,


अपनी दुनिया के बातो पर सोए रहते हैं,

दूसरो के दुख में उन्हे खुशी लगती है,


अपने सुख में भी कमी लगती है,

हम उबर नहीं सकते क्योंकि हमें,

बाहरी दुनिया ही बेहतरीन लगती है।


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