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Arti pandey Gyan Pragya

Abstract

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Arti pandey Gyan Pragya

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औरत

औरत

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औरत इक इक तिनके से हीअपना नीड़ बनाती है,

नन्हें नन्हें सपनों के रंगो से उसे सजाती है।


खो देती हैं अपने को सपनों में भरने को रंग,

इस आशा और उर्जा से कि जीवन में आये वसंत।


नन्हे कोमल गुलाबी हाथ माँ की छाती पर जब लगता है,

जीवन दायिनी धारा बनकर माँ का दूध छलकता है।


इक औरत के जीवन पर हो जाता है सबका अधिकार,

जो सृष्टि के पालन पोषण की वह है एकमात्र आधार।


इस सृष्टिकर्त्ता की अदभूत रचना का तुम सम्मान करो,

नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब प्रकृति को विरान करो।


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