Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

और मैं मीरा से राधा हो जाऊं

और मैं मीरा से राधा हो जाऊं

1 min 168 1 min 168

रिमझिम सी बरसात

याद दिलाती है फिर वो रात

चाँद जब बादलों के पीछे छुपा था

कभी घूंघट ओढ़े कभी खोले खड़ा था


उसकी इस लुका छिपी के साथ

हम भी लुक छिप रहे थे

अलग अलग कोने में खड़े

इक दूजे को देख रहे थे


वो टप टप बरसता पानी

और वो रात में छलकती चांदनी

उसकी सिर्फ याद ही आज

भी सुकून दे जाती है


हर बारिश फिर तेरी याद दिला जाती है

पास तो तुम अब भी मेरे हो

पर दुनिया के डर के मारे थोड़े दूर खड़े हो

इंतजार है मुझे फिर चांदनी का

और चांदनी में भीगती फिर उस रात का


जब तुम सिर्फ मेरे थे

चाहे हम तब भी दूर खड़े थे

पर दिलो दिमाग से तो जुड़े थे

फिर से भीगना है मुझे तुम्हारी

चाहत की बरसात में


हाथ थाम कर चलना है फिर भीगी रात में

जहां कोई ना हो बस मैं और तुम हो

और बस बारिश का शोर हो

तुम मुझ में, मैं तुम में खो जाऊँ

और मैं मीरा से राधा हो जाऊँ।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Shelly Gupta

Similar hindi poem from Romance