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Archana Tiwary Archana Tiwary

Tragedy

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Archana Tiwary Archana Tiwary

Tragedy

अतीत के पल

अतीत के पल

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जिंदगी के इस गति और मौत के उस छोर तक 

उलझी हुई एक खामोश कड़ी बन गई हूं 

हौसला तो बुलंद था जिंदगी को जीने का 

फिर लगता कभी कभी

वो किताब बन कर रह गई हूं 

पीछे रख भूल गए जिसे सभी 

धूल की एक मोटी परत दिखती जिसके चारों ओर 

अतीत के भूले बिसरे लम्हों की कड़ी 

बेड़ी बन जकड़ने को है आतुर अब तक 

बाहर आने को मचलता ये मन सफर पर अकेला निकल पड़ता अक्सर।


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