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Vimla Jain

Tragedy Action

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Vimla Jain

Tragedy Action

अशांत मन

अशांत मन

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अशांत मन बेचारा क्यों रोज रोज अशांत रहता है

हर जरा जरा सी बात में दुश्चिंता से भर जाता है 

अशांत मन बेचारा दुश्चिंताओं का मारा

जरा जरा सी बात पर बेचैन हो जाता

कभी परीक्षा का रिजल्ट

कभी खून के जांच का रिजल्ट

कभी नौकरी के इंटरव्यू का रिजल्ट

कभी कोई समय से ना आया हो

कभी कोई समाचार ना आया

है दुश्चिंताओं में भरा यह मन

इतना बेचैन हो उठता है कि ,

जब तक सब सही नहीं हो

शांत होने का नाम नहीं लेता

फिर एक दिन मैंने मेरे मन को समझाया

क्यों रे जीवड़ा तू इतना बेचैन रहता

थोड़ा भगवान पर भरोसा कर,

जो होगा वह अच्छा ही होगा

आने वाली आफत से क्या घबराना

हिम्मत से काम ले, कुछ भी बुरा नहीं होगा

है तेरा ईश्वर तेरे साथ फिर यह घबराना कैसा

अगर एक जगह कुछ तकलीफ है तो,

दूसरी जगह उसका हल भी है

इसलिए ए बेचैन मन तू घबराना छोड़ दे

दिल में शांति धारण कर 

और मैंने घबराना छोड़ दिया

अब तो जो परिस्थिति होगी उससे निकलेंगे

कभी ना हम घबराएंगे

हर परिस्थिति से निकल ही जाएंगे।



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