अरसे से बंद है दरवाजे
अरसे से बंद है दरवाजे
जरा हौले से खड़काओ कई अरसे से बंद है दरवाजे
अरे मोहतरमा, घर के नहीं दिल के दरवाजे
सहेज के रखा है तेरी हर याद को , तेरे प्यार को
वो मीठी सी तकरार को
ज़रा हौले से खडकाओ दिल के दरवाजे को
अलबत्ता खड़काना क्या है, चले आओ पास अपने यार के।

