अपनी जान के दुश्मनों से करो ना प्यार
अपनी जान के दुश्मनों से करो ना प्यार
हो तुम बहुत ही होनहार,
और बड़ी ही समझदार,
मेरे देश की बेटियों।
फिर क्यों करती हो अपने हाथों से,
अपना ही जीना तुम दुश्वार,
मेरे देश की बेटियों।
क्यों करती नहीं हो तुम,
मन में थोड़ा सा भी विचार,
मेरे देश की बेटियों।
क्या मां बाप के प्यार से बढ़कर भी,
होता है किसी और का कभी प्यार,
मेरे देश की बेटियों।
फिर क्यों करती हो हरदम तुम,
उन से हरपल यूं ही तकरार,
मेरे देश की बेटियों।
क्यों उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़,
तुम करती हो किसी को स्वीकार,
मेरे देश के बेटियों।
उम्र में है वे बड़े तुमसे,
और तजुर्बे भी हैं उन्हें बेशुमार,
मेरे देश की बेटियों।
तुम्हारी फिक्र है उनको,
इसलिए करते तुम्हारे प्यार से इनकार,
मेरे देश की बेटियों।
क्या पढ़ती नहीं हो तुम रोज़ अख़बार,
या सुनती नहीं हो तुम समाचार,
मेरे देश की बेटियों।
झूठा है आज के वक्त का प्यार,
बना है बेहद ही स्वार्थी और मक्कार,
मेरे देश की बेटियों।
जिनके वादों का करती हो इकरार,
वो छोड़ जाते हैं मंझधार,
मेरे देश की बेटियों।
करते हैं तुम पे कितने अत्याचार,
और करते हैं तुम पे कितने ही वार,
मेरे देश की बेटियों।
अब तो हो जाओ होशियार,
अपनी सुरक्षा के लिए तुम तैयार,
मेरे देश की बेटियों।
अपने मां बाप पर कर लो ऐतबार,
अपना जीवन करो न यूं बेकार,
मेरे देश की बेटियों।
मां बाप को बनाओ अपना सलाहकार,
और बनाओ उन्हें राज़दार,
मेरे देश की बेटियों।
एक उनका ही है सच्चा प्यार,
जो रहेगा हमेशा ही बरकरार,
मेरे देश की बेटियों।
अपने ख़ून से खेलने का,
न दो किसी को भी अधिकार,
मेरे देश की बेटियों।
अपनी जान के दुश्मनों से,
करो ना तुम कभी भी प्यार,
मेरे देश की बेटियों।
