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Avadhesh Kumar

Abstract

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Avadhesh Kumar

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अपनी है भाषा हिंदी

अपनी है भाषा हिंदी

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अपनी है भाषा हिंदी, सिर की है मानो बिंदी, 

बोले बौद्ध सिक्ख सिंधी, इस को सलाम है।


इस में मिठास बड़ी, जोड़े दिल की ये कड़ी,

 लिखो पढ़ो घड़ी-घड़ी, जरूरी ये काम है ।


खोजो एक अच्छा गुरू, आज से ही कर शुरू,

रच नित कविता तो, हासिल मुकाम है।


इसमें अनेक कवि, सूर्य-चंद्र सी है छवि,

शोभे ये तो जैसे रवि, दुनिया में नाम है।



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