अपनी अपनी दुनिया अपना अपना सुकून
अपनी अपनी दुनिया अपना अपना सुकून
अपनी अपनी दुनिया
यह जिंदगी है जनाब
यह दुनिया है जहां अलग-अलग तरह के लोग अपनी-अपनी तरह की जिंदगियां जीते हैं।
अलग-अलग समस्त सजीव जाति के पशु पक्षी, पेड़ पौधे, कीड़े मकोड़े, सबकी अपनी अलग होती है दुनिया।
और सब अपनी अपनी दुनिया में रहते हैं खुश।
कहानी पक्षियों की चहचहाहट
कहीं पेड़ों की ठंडी हवा के झोंके।
सुकून देते जिंदगी में यह सब अनेरे।
जानवरों की दुनिया तो एकदम अलग ही होती कहानी जंगल में सभाएं जुड़ती।
दुश्मनी दोस्ती में यह जिंदगी है चलती।
अब इंसानों की बात करें तो
हर किसी की दुनिया अलग-अलग रंगों की है,
किसी की उम्मीदों में, किसी की उमंगों की है।
कोई देखे सपने सितारों से भरे,
कोई रहे ज़मीं पर, ख्वाबों में खड़े।
कोई बुनता कहानियाँ, अपनी तन्हाइयों में,
कोई पाता सुकून, अपनों की परछाइयों में।
कहीं चलती है जिंदगी, रफ्तार से तेज,
कहीं थम जाती है, चुपचाप से खड़े।
हर दिल में बसी है, एक अनोखी दास्तां,
हर आँखों में छुपे हैं, अपने-अपने आसमां।
रिश्तों की खुशबू में कोई महकता है,
तो किसी के लिए सपनों का शहर बसता है।
हर किसी की दुनिया का रंग निराला है,
सब अपने जैसे लोग ढूंढ ही लेते हैं और अपनी दुनिया बसा ही लेते हैं।
अपनी-अपनी दुनिया, सबसे प्यारी है।
सुकून और शांति देती निराली है ।
