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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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अपना धर्म

अपना धर्म

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ये अपना धर्म है, ये अपना कर्म है

मां भारती को हमें सज़दा करना है

जब तक चलती रहेगी,हमारी सांसें

देश को आतंवादियों से मुक्त करना है


एक एक घर से देश के गद्दारों को,

हमे दुनिया से अलविदा करना है

ये अपना धर्म है, ये अपना कर्म है

मां भारती को हमे सज़दा करना है


इस माटी में पैदा हुए,

इस माटी में ही मर जायेंगे

मरने से पहले हमें

इस माटी का कर्ज अदा करना है


हम सब इस माटी के ही निपजे हीरे है

हमे अंधेरी राहों में उजाला करना है

ये अपना धर्म है, ये अपना कर्म है

मां भारती को हमे सज़दा करना है


हमने देखा, भारत का सुनहरा ख़्वाब

इस ख्वाब को हक़ीक़त करना है

ये हम सबका ही देश धर्म है

तोड़ देना पूरी दुनिया का भ्रम है


हमे तिरंगे को फ़लक तक ऊँचा करना है

फ़िर से देश को सोने की चिड़िया करना है

ये अपना धर्म है, ये अपना कर्म है

मां भारती को हमें सज़दा करना है।


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