Abhay kashyap
Abstract
जब जब वो मुझसे रूठा है,..
तब तब अपनों ने लुटा है,
मतलब की इस दुनिया में
हमारी यारी का किस्सा सबसे अनूठा है।
जीवन के मुश्किल लम्हों में
मुझपर उसका विश्वास अनूठा है
मेरे लिए
तुझमें मुझमें
कुछ तो कर
अनूठी यारी
एक तरफ़ा इश्क...
अनकहे अल्फ़ाज...
ख़ामोश इश्क़
दरमियान
होगा
राधे-राधे
वो मरने की वजह बन जाये आपका यकीन मर जाये। वो मरने की वजह बन जाये आपका यकीन मर जाये।
बेटियाँ है एक अमूल्य निधि , प्रकृति की अद्भुत रचना है , जीवन में बसंत और उल्लास है ! बेटियाँ है एक अमूल्य निधि , प्रकृति की अद्भुत रचना है , जीवन में बसंत और उ...
ईश्वर का मान रखो, और उनके इस उपहार को व्यर्थ मत समझो। ईश्वर का मान रखो, और उनके इस उपहार को व्यर्थ मत समझो।
ये वो नफ़रत है ये जो मोहब्बत है’ बस तुम ही वो हो जो कभी प्यार ना कर पाओगे। ये वो नफ़रत है ये जो मोहब्बत है’ बस तुम ही वो हो जो कभी प्यार ना कर पाओ...
यह ज़िन्दगी ही अधूरी सी लगती है इक तेरे साथ के सिवा मेरी जान। यह ज़िन्दगी ही अधूरी सी लगती है इक तेरे साथ के सिवा मेरी जान।
तब यह खूब धड़कती हैं पागल पागल हो जाती हैं। तब यह खूब धड़कती हैं पागल पागल हो जाती हैं।
कौन भेड़िया बने खाल ओढ़े घूम रहा है गर्म खून की प्यास बुझाने को। कौन भेड़िया बने खाल ओढ़े घूम रहा है गर्म खून की प्यास बुझाने को।
सीधी बात वालों का करती दुनिया सम्मान, सीधी बात वाले कहलाते महान। सीधी बात वालों का करती दुनिया सम्मान, सीधी बात वाले कहलाते महान।
हरिश्चंद्र और गांधी ने भी सत् पर हमको सिखाया चलना। हरिश्चंद्र और गांधी ने भी सत् पर हमको सिखाया चलना।
किस बात से डरी हैउमंग द्वार पर खड़ी है फिर भी कैसा खालीपन है यह कैसा खालीपन है। किस बात से डरी हैउमंग द्वार पर खड़ी है फिर भी कैसा खालीपन है यह कैसा ...
बिजली की चमक और उसके शोर से डरना, है संकेत वर्षा ऋतु का आना। बिजली की चमक और उसके शोर से डरना, है संकेत वर्षा ऋतु का आना।
स्वाभिमान की अमिट कथायें, जलती जौहर की ज्वाला है। स्वाभिमान की अमिट कथायें, जलती जौहर की ज्वाला है।
अब सिर्फ दीद का बनी सहारा है पलकों तले करती बस नज़ारा हैं। अब सिर्फ दीद का बनी सहारा है पलकों तले करती बस नज़ारा हैं।
बहुत सी किताबे तो नहीं पढ़ी, कभी फुर्सत ही नहीं मिली! बहुत सी किताबे तो नहीं पढ़ी, कभी फुर्सत ही नहीं मिली!
शायरी कुछ और नहीं , जज़्बातों का एक दरिया है .. शायरी कुछ और नहीं , जज़्बातों का एक दरिया है ..
लाख यत्न करने पर भी वे न आते होंगे, ओ री लता ! तुझपे भँवरे मंडराते होंंगे। लाख यत्न करने पर भी वे न आते होंगे, ओ री लता ! तुझपे भँवरे मंडराते होंंगे।
लोभ मोह जो त्याग दे, वो साधक बन जाय।। लोभ मोह जो त्याग दे, वो साधक बन जाय।।
बेटी थी मैं, तू है तेरे सर आसरा दिया ऐसे आसराओं ने ही तो, वैश्य बना दिया। बेटी थी मैं, तू है तेरे सर आसरा दिया ऐसे आसराओं ने ही तो, वैश्य बना दिया।
सारी चिंता भूलकर के बचपन की तरह आपकी गोद में सर रख के चैन की नींद सो जाना है। सारी चिंता भूलकर के बचपन की तरह आपकी गोद में सर रख के चैन की नींद सो जाना है।
पर सोती में तन्हा ही हूँ और होती मैं तन्हा ही हूँ। पर सोती में तन्हा ही हूँ और होती मैं तन्हा ही हूँ।