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Manju Rani

Inspirational

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Manju Rani

Inspirational

अनुभव

अनुभव

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चल रही थी जीवन

की पथरीली राह पर ।

अपने ख्यालों में मगन

चल रही अपनी राह पर ।

तभी नजर पड़ी मनमोहक

अति सुंदर नव रंगी पुष्प पर ।

पूछा मैंने, तुम आए

कैसे यहाँ इन पत्थरों पर ।

बोला, तुम्हारे ही कारण

उद्गम हुआ मेरा यहाँ पर ।

मेरा बीज कब से दबा

पड़ा था पाषाणों में यहाँ पर ।

तुम्हारे आँसुओं ने दिया

जीवन इस पथरीली रहा पर ।

मैंने कहा, आँसू तो

बहुत बार बाहे इन शिलाओं पर ।

ऐसा क्या था उस बार

उन असवन में जो बहे यहाँ पर ।

उस बार जीवन के नव रंगों

से भरे थे अश्रु जो गिरे यहाँ पर ।

मैंने भी फूट-फूटकर बहाए

जब तक रिक्त न हुई यहाँ पर ।

बरखा भी न रिस पाई पर

तुम्हारे आँसू रिस गए प्रस्तर पर ।

और हम दुनिया के

सर्वश्रेष्ठ फूल खिल गए प्रस्तर पर ।

अनुभवों से भरे अश्रु

रिक्त पड़े नहीं रहते कहीं पर ।

वे बंजर-पथरीली भूमि

को भी महका देते हैं यहाँ पर ।

उस दिन जान गई

कीमत अपने आँसुओं की वहाँ पर ।

अब न ऐसे ही बहाऊँगी

ये मोती किसी भी जगह पर ।

सजा कर रखूँगी

मैं इन्हें अपने दिल पर ।


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