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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

अंतरंग लम्हों की फुसफुसाहट

अंतरंग लम्हों की फुसफुसाहट

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उन दिनों बड़े मायूस से रहा करते थे हम

वो जो मिला तो होंठों पे मुस्कुराहट दे गया !


रूठ से गए थे हम अपनी ही ज़िन्दगी से

मुझमें समाकर वो जीने की आहट दे गया !


एक उसका नाम जो जुड़ा मेरे नाम से

मेरी ज़िन्दगी को वो तमाम जगमगाहट दे गया!


वो एक लम्हा स्पंदन का और समर्पण का

बाहुपाश में बाँध होंठो पर थरथाराहट दे गया !


और ज़ब हम उनसे मिलकर बिछड़ने लगे तो

चुपके से फिर आने की एक सुगबुगाहट दे गया!


अब हर ज़ुबान पर चस्पां हैं हमारे इश्क के किस्से

उन बेहद अतरंग लम्हों को एक फुसफुसाहट दे गया !


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