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Praveen Gola

Romance

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Praveen Gola

Romance

अंतरिक्ष में मिली मुझे सजा

अंतरिक्ष में मिली मुझे सजा

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बिना पानी बिना हवा, तेरे दिल के लिफाफे में, कैद हूँ मैं ऐसे जैसे, अंतरिक्ष में मिली मुझे सजा।

रात - दिन तेरे दिल के, मैं चक्कर काटूँ बेहिसाब, तू सब जान के भी अंजान बन, देता ना मेरे सवालों का जवाब।

तेरा भीतर का अंतरिक्ष, मेरा बाहर का आकाश, कितना अच्छा हो जो हम, मिल जायें साथ - साथ।

मुझे बंद करके तूने, अच्छा ना किया दिलबर, अब किसी दूसरे पर, टिकती नहीं ये नज़र।

इजहार दिल से अब, तू भी कर दे सनम, एक हो जायें चलो अब, हम दोनों जन्म - जन्म।

बिना पानी बिना हवा, तेरे दिल के लिफाफे में, कैद हूँ मैं ऐसे जैसे, अंतरिक्ष में मिली मुझे सजा।।


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