STORYMIRROR

Sunil Kumar

Abstract

4  

Sunil Kumar

Abstract

अन्नदाता किसान

अन्नदाता किसान

1 min
24.4K

देख दशा किसान की

मन बहुत व्यथित है आज

अन्नदाता ही इस देश का

क्यों है आज बेहाल।


खून पसीना एक कर

करता जो निशदिन काम

जाड़ा- गर्मी- बरसात

कभी करता नहीं ये आराम

फिर अन्नदाता ही इस देश का

क्यों है आज बेहाल।


कभी ओला कभी बारिश

कभी तेज आंधी-तूफान

प्रकृति का हर सितम

सहता है किसान

फिर अन्नदाता ही इस देश का

क्यों है आज बेहाल।


कृषि प्रधान देश अपना

कृषक है इसकी शान

जय जवान- जय किसान

कहता सकल जहान

फिर अन्नदाता ही इस देश का

क्यों है आज बेहाल।


खून पसीने से अपने

करता धरती का श्रृंगार

फिर अन्नदाता ही इस देश का

क्यों है आज बेहाल।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract