अन्नदाता किसान
अन्नदाता किसान
देख दशा किसान की
मन बहुत व्यथित है आज
अन्नदाता ही इस देश का
क्यों है आज बेहाल।
खून पसीना एक कर
करता जो निशदिन काम
जाड़ा- गर्मी- बरसात
कभी करता नहीं ये आराम
फिर अन्नदाता ही इस देश का
क्यों है आज बेहाल।
कभी ओला कभी बारिश
कभी तेज आंधी-तूफान
प्रकृति का हर सितम
सहता है किसान
फिर अन्नदाता ही इस देश का
क्यों है आज बेहाल।
कृषि प्रधान देश अपना
कृषक है इसकी शान
जय जवान- जय किसान
कहता सकल जहान
फिर अन्नदाता ही इस देश का
क्यों है आज बेहाल।
खून पसीने से अपने
करता धरती का श्रृंगार
फिर अन्नदाता ही इस देश का
क्यों है आज बेहाल।
