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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Fantasy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Fantasy

अनजाना राही

अनजाना राही

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किसे पता था कि एक अनजाना सा राही 

अनजाने रास्तों पर यूं अचानक मिल जायेगा 

दिल के समंदर में इश्क की लहर बनकर 

एक दूजे के अहसासों को सराबोर कर जायेगा 

यकीन नहीं होता है कि एक अनजाना सा व्यक्ति

इस जन्म का ही नहीं जन्मो जन्मो का मीत बन जायेगा 

उसके बिना हर पल, लम्हा अधूरा सा लगता है

वो इस कदर मेरे दिलो दिमाग पर छा जायेगा 

कुछ तो बात है जो डूबे हैं इस कदर इश्क में "हरि"

उनके हुस्न का जादू न जाने और क्या गुल खिलायेगा 

जजबातों की किताब में दिल की जुबान से कोई

मुहब्बत का एक अफसाना फिर से लिखा जायेगा 

वो मेरा प्यार, जिंदगी, रब, खुदा, हमसफर सब है

कोई मेरी नजरों से देखे तब तो कुछ समझ पायेगा 



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