STORYMIRROR

Kavita Yadav

Romance

3  

Kavita Yadav

Romance

अनजान सफर उसका था

अनजान सफर उसका था

1 min
255

अनजान सफर उसका था

अनजान सफर मेरा भी था

ना में रुकी सफर में

ना रुका कोई और


पिछले सारे दर्द भुला कर

अगले सारे साथ आ जाये

सफर चाहे केसा भी हो

हमको अपने साथ मिला ले


पतझड़ आकर चला गया

नई - नई खुशियां हमसे मिले

उम्मीद ये अपनी

मन मे लगा कर

अनजान सफर यू बीत चला


अनजान सफर उसका था

अनजान सफर मेरा भी था


कभी नही हम उसको भूले

जिसने मेरे दर्द में भी

साथ दिया है दिल से मेरा

ऐसा साथी सबको मिले।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance