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V. Aaradhyaa

Tragedy

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V. Aaradhyaa

Tragedy

अंधेरों की जड़ें

अंधेरों की जड़ें

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पहले तो कसके झिंझोड़ा जायेगा,

और फिर इस दिल को तोड़ा जायेगा


इक समंदर की ख़ुशी के वास्ते,

प्यास को कबतक मरोड़ा जायेगा


दुख भी सुख के साथ रह लें इसलिए,

अश्क को होंठों से जोड़ा जाएगा


झोपड़ी से जाके मिल जाएं न ये,

महल के रस्तों को मोड़ा जायेगा


इन अंधेरों की जड़ें हिल जायेंगीं,

जब उजालों को निचोड़ा जायेगा


क्या पता था उनकी यादों को कभी

रक्खा जायेगा, न छोड़ा जायेगा।


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