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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Thriller

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बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Thriller

अंबे की हाथो का दर्शन

अंबे की हाथो का दर्शन

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आओ दर्शन जाने मां भवानी की हाथों की....

बेड़ा पार करेगी जगजननी भवसागर की....


प्रथम भुजा स्वास्थ्य का सदैव ध्यान रखो....

खानपान योगा से हर क्षण खुशहाल रहने की....


द्वितीय भुजा में समाहित हुआ है विद्या हमारा...

मनुष्यता के कर्तव्य को हृदय से करने की...


तृतीय भुजा ने बतलाया धन कितना जरूरी है...

ईमानदारी ,किफायतशारी सही मार्ग से धनी बनने की...


व्यवस्था को इंगित करता अंबे का चतुर्थ भुजा....

जागरूकता, नियमितता मर्यादा लाए भाव शिष्टाचार की...


पंचम भुजा दर्शाए संगठन की रूपरेखा...

वर्तमान में नितांत आवश्यकता है, एकता की....


जिंदगी में यश का गुणगान करता छठवां भुजा...

देह मरे पर यश रहे , बातें नीति कारों की...


सातवें में मां ने शौर्य को को रखा है...

इतिहास भरा पड़ा है ,पराक्रमी योद्धा शक्तिमान की...


अंत अष्टभुजा सत्य का भान कराता...

असत्य को पछाड़ता बताता सत्कर्म जीत की...

आओ....

         



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