अनाम बंधन
अनाम बंधन
नहीं बाँधा जा सकता है
दोस्ती को किसी निश्चित दिन में,
किसी निश्चित दायरे में,
दोस्ती तो अगणित दिन और रात का,
अटूट साथ है, एक विश्वास है।
एक अनवरत बहती हुई
मीठी नदी है,
सर्दियों की गुनगुनाती धूप है
बारिश की ठंडी फुँहारें है।
दोस्ती हर मुसीबत के सामने
खड़े रहने का दृढ़ संकल्प है,
अपनेआप के होने का बड़ा अहसास।
यही जानकर
निभाया था अपना फ़र्ज़
एक दोस्त ने अपना सारा
बड़प्पन छोड़कर,
लग गया था गले तपाक से,
ख़ूब रोए थे फिर गले मिलकर दोनों,
सारा खारापन बहा दिया था,
सारी नमकीन परतें
उखड़ गयीं थीं ज़ख़्मों पर से।
मैं भी ज़ख़्मी हूँ
ठीक उसी तरह, मुसीबतों के पत्थरों से,
मेरा कृष्ण कहाँ है,
मुझे बहुत इंतज़ार है तेरा !!!
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