STORYMIRROR

Rahulkumar Chaudhary

Tragedy Action Thriller

4  

Rahulkumar Chaudhary

Tragedy Action Thriller

अकेला दिल

अकेला दिल

1 min
184

दिल दो किसी एक को और वो भी किसी नेक को, 

मंदिर का प्रसाद नहीं... जो बांट दो हर एक को।

 

जो ना मिला था अब तक मुझको ज़िन्दगी गंवा के

पा लिया वो सब मैंने बस एक तुम्हारा साथ पाकर


कितने दर्दनाक थे वो मंज़र, जब हम बिछड़े थे, 

उसने कहा था जीना भी नहीं और रोना भी नहीं !


कहने को ही मैं अकेला हूं पर हम चार हैं।

एक मैं, मेरी परछाई, मेरी तन्हाई और तेरा एहसास।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy