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Praveen Gola

Abstract

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Praveen Gola

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ऐसी क्या खता हो गई सनम ?

ऐसी क्या खता हो गई सनम ?

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ऐसी क्या खता हो गई सनम ?

जो तुमने हमे बदनाम किया,

एक हल्की सी हँसी को हमारी,

कत्ल ~ए ~आम का नाम दिया।


कह देते हमे खुद से ही अगर,

तो फिर ना रखते दुबारा कदम,

क्यूँ किसी को ढाल बना कर,

इश्क को ऐसे बदनाम किया।


पता ना था कि तुम पिघल जाओगे,

हमारी छोटी सी शरारत से इस कदर,

रातों को जगने की आदत बुरी है,

इस आदत को तुमने एक नाम दिया।


दिल टूटा अब कसम से यारा,

ये फिर ना जुड़ेगा तेरे संग कभी,

तू चाहे जितना लाख मना ले,

इसने तेरी हर बात को दिल पे लिया।


तुझे हटा अपने मस्तिष्क पटल से,

तेरी और ना रुख अब करेंगे कभी,

अच्छा ही हुआ जो समय से पहले,

तेरी नीयत का चिठ्ठा साफ हुआ।


सिर्फ एक संदेश जिसमे था ना कुछ ऐसा,

उसको ही तुमने बनाया बवाल,

इसी तुम्हारी ओछी हरकत से हमने,

अपने रस्ते का रुख अब मोड़ दिया।


ऐसी क्या खता हो गई सनम ?

जो तुमने हमे बदनाम किया,

एक हल्की सी हँसी को हमारी,

कत्ल ~ए ~आम का नाम दिया।।


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