ऐलान
ऐलान
हमें बदनाम करने की असफल प्रयास करके
क्या तुम हमारा उखाड़ लोगो ?
हैसियत क्या है तेरी ?
देखते हैं हम भी क्या तुम हमारा बिगाड़ लोगो ?
समय अभी अनुकूल नहीं !
इसलिए फिलहाल हम मौन हैं।
सही समय का इंतजार करो तुम ,
हम भी बतला देंगे की हम कौन हैं ?
मुकाबला हमारा कर नहीं सकते !
इसलिए हमें बदनाम कर रहे !
बराबरी करने की कभी बात भी मत सोचना !
ये तेरे जैसे कायरों के बस की बात नहीं !
मगर एक बात तुम सदैव याद रखना,
आसमान में थूकने पर छींटा उलट कर नीचे ही आता है।
किस वहम में तुम जी रहे हो ?
तुम्हारे कुकृत्य का अंजाम बहुत बुरा होगा !
लहजा भले ही बदला होगा हमारा,
मगर इंतकाम एक दिन अवश्य ही पूरा होगा।
जिस नफरत की बीज जो तुम आज बो रहे हो ?
फसल काटने के लिए भी तुम ही तैयार रहना।
