अहमियत समझ आती किसी की उनके चले जाने के बाद
अहमियत समझ आती किसी की उनके चले जाने के बाद
अहमियत समझ आती किसी की उनके चले जाने के बाद,
जाने वाले चले जाते हैं, रह जाती हैं पीछे, बस उनकी याद,
फिर यादें बन ही वो ज़िंदगी के हर लम्हें में होते हैं शामिल,
चले जाते इतनी दूर कि चाहकर भी बुला नहीं सकते पास,
अपने होते बड़े अनमोल, संभालो उन्हें जब तक है जीवन,
किस पल कौन साथ छोड़ जाएगा नहीं किसी को आभास,
पल-पल कटती है ये जिंदगी बस उनकी यादों के सहारे ही
ढूंँढती हैं आंँखें जिन्हें, हर लम्हें में रहता है उनका एहसास,
लड़ते झगड़ते हैं एक दूजे से, जब होते हैं नज़रों के सामने,
चले जाते हैं जब, तभी समझ आता है, कितने थे वो खास,
रूठकर दूरी बना लेना, अहंकार में, अपनों को ना मनाना,
यही अहम भाव अपनों के बीच क्षीण करता जाता विश्वास,
पर भूल जाता है इंसान एक दिन सभी को तो है चले जाना,
जो करना है कर लो अंत समय तो केवल रह जाता है काश,
पीछे रह जाएगा पछतावा लौटकर वो पल कभी न आएगा,
अंधकार का ये पल आने से पहले जीवन में भर लो उजास,
माना जिंदगी का सफ़र रूकता नहीं किसी के चले जाने से,
किंतु किसी मोड़ पर तो कचोटती उनकी कमी उनका साथ,
तकदीर कब तस्वीर बन जाए,ये सांँसें किस पल रुक जाएं,
अगले मोड़ पर शायद वो ना मिलें, जो चल रहे अभी साथ,
अपनों को मनाना सीखो, दूर जाते हुए को, रोकना सीखो,
वक्त रहते करो बात, इससे पहले कि बनकर रह जाए याद।
