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AVINASH KUMAR

Abstract

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AVINASH KUMAR

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अधूरा है मेरा इश्क़

अधूरा है मेरा इश्क़

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जुनूनें दिल उन्हें मेरा गवारा भी नही होता,

यहाँ उनके बिना मेरा गुज़ारा भी नही होता


जहाँ हम ढूंढते हैं लौ, हमें बस राख मिलती है,

उठाने को नयी लपटें, शरारा भी नही होता


दिखाना गर नही होता , अदाओं का हमें जलवा,

तो चेहरा आप ने अपना संवारा भी नही होता,


हमें तुमसे मुहब्बत है , ये सारे जग पे ज़ाहिर है 

तेरे दिल मे मगर क्या है इशारा भी नही होता,


जो हमने चांद की ख्वाहिश, खुदा से की नही होती  

ज़मीन पर् अाप को उसने उतारा भी नही होता,


अधूरा है मेरा इश्क़ भी तेरे नाम के बिना..

जैसे अधूरी है राधा श्याम के बिना।


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