STORYMIRROR

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Abstract

3  

DR ARUN KUMAR SHASTRI

Abstract

अब्र - ए - सुखन

अब्र - ए - सुखन

1 min
219

 

तन्हाई मुकद्दर है 

रूसवाई तख्खलुस है 

बे परदगी मौजू है 

तिश्नगी बाजु में है 

समंदर अश्क का हर सू है 

तू बता तू कौन है 

क्यूं पकड के खड़ा यादें 

वो गई छोड़ के 

तेरा क्या ले गई 

साथ जिसके गई 

साथ रहने की तो नहीं

तू बता तेरा क्या ले गई 

खुदा ने दी थी 

खुदा ने ले ली 

तू खाम्ख्वा परीशां है 

मोहब्बत में क्या रखा है 

झुक कर सलाम करना ही अच्छा है 

इबादते अब्र रोशन कर 

मुस्कुरा सब मिलेगा 

सब्र कर सब्र कर सब्र कर 

जिस जिस पे 

तिरा नाम लिखा रखा है  



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract