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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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अबकी होली में

अबकी होली में

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अबकी होली में

आंखों के रंग को

शब्दों में रंगना है

रंगों की दुनिया में


एक नया रंग जमाना है और

वो जो होली में मस्त हैं

और वो जो होली की तैयारी में है

और वो जिन्होंने नाम भी

नहीं सुना है होली का


सबको, सबको

उसी रंग में रंगना है

किसी के गाल पर

तो किसी की चुनरी पर


किसी कुर्सी पर

किसी के धर्म पर

किसी की कविता पर

किसी की कहानी पर


किसी की कलम पर

किसी की स्याही पर

किसी के मूड पर

किसी की कामना पर


किसी के उलाहना पर

किसी की जीत पर

किसी की हार पर

किसी के उम्मीद पर


किसी के विश्वास पर

किसी के विवाद पर

तो किसी के मन पर

वही रंग कुछ यूं मलना है

कि जो आये रंग की जद में।


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